सभी भक्तों को जय श्री राम। आप सभी जानते हैं कि श्री हनुमान भगवान श्री राम के बहुत बड़े भक्त हैं। हनुमान जी की श्रीराम भक्ति संसार में भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण है। आज इस लेख में हम हनुमान जी के बारे में जानेंगे। तो चलिए जय श्री राम
🕉️ हनुमान जी का जीवन परिचय
हनुमान जी हिंदू धर्म के सबसे पूजनीय देवताओं में से एक हैं। वे भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार माने जाते हैं। उनका जीवन साहस, भक्ति, सेवा और बल का प्रतीक है। उनका उल्लेख मुख्यतः रामायण और विभिन्न पुराणों में मिलता है।

1. जीवन परिचय और इतिहास
हनुमान जी का जन्म कब और कहां हुआ था?
हनुमान जी का जन्म चैत्र पूर्णिमा को माँअंजनादेवी और केसरी जी के घर हुआ था। उनका जन्मस्थान कर्नाटक के किष्किंधा क्षेत्र या कुछ मान्यताओं के अनुसार झारखंड के अंजनी पर्वत को माना जाता है।
हनुमान नाम कैसे पड़ा?
बाल्यकाल में जब हनुमान जी ने सूर्य को फल समझकर निगल लिया, तब देवताओं ने क्रोधित होकर उन्हें श्राप दिया, जिससे उनके गाल (हनु = ठुड्डी) सूज गए। इसी कारण उनका नाम पड़ा “हनुमान”।
2. कहानियाँ और रहस्य
👶 हनुमान जी के बचपन की कहानी
हनुमान जी बचपन में अत्यंत नटखट थे। उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगल लिया था। बाल्यकाल में ही उन्होंने अष्ट सिद्धियों और नव निधियों का वरदान प्राप्त किया।
📖 हनुमान जी की पूरी कहानी और प्रेरणादायक प्रसंग
रामायण में हनुमान जी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। सीता माता की खोज से लेकर लंका दहन और संजीवनी लाने तक की घटनाएँ उनकी वीरता का प्रतीक हैं।
उनकी कहानियाँ आज भी हमें साहस, सेवा और भक्ति की प्रेरणा देती हैं।
प्रमुख गुण और शिक्षाएँ
शक्ति, बुद्धिमत्ता, सेवा और भक्ति का संगम — अष्टसिद्धि निपुण, संकटमोचन, निर्भय, विनम्र
- दास्यभक्ति का आदर्श—स्वयं को राम के चरणों में अर्पित कर दिया
- राजनीति, कूटनीति, वक्तृत्व, संगीत और व्याकरण में पारंगत

रामायण में योगदान
- दूत और मित्र: सुग्रीव से मित्रता, विभीषण को राम की ओर मोड़ना, लंका में सीता को पहचानना और संदेश देना
- लंका दहन और संकटमोचन: लंका में आग लगाना, संजीवनी बूटी लाना — उनकी निस्वार्थ सेवा की मिसाल
- रामराज्य में सेवा: युद्ध के बाद भी राम के भक्त और सेवक बने रहे
- भक्ति का आदर्श: अष्टसिद्धि–नव निधि के अधिपति — फिर भी कहा:
“मोरु मनोरथु जानहु नीकें… राम लखन सीता मनु दीन्हें।”
💪 हनुमान जी की विशेषताएं और शक्तियाँ
- अष्ट सिद्धि और नव निधि के स्वामी
- अचल ब्रह्मचारी
- असीम बल, बुद्धि और भक्ति
- अमरता का वरदान
पूजा, पाठ और प्रभाव
- लोकप्रिय स्तोत्र—हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान कवच, आरती और मंत्रों के माध्यम से भय, कष्ट, और बाधाओं से मुक्ति मिलती है
- मंगलवार–शनिवार का विशेष महत्व—शनि दोष और भय से मुक्ति के लिए इन दिनों का पाठ फ़ायदेमंद माना जाता है
पंचमुखी हनुमान जी का रहस्य
हनुमान जी ने अहिरावण वध के समय पंचमुखी रूप धारण किया था:
- हनुमान
- नरसिंह
- गरुड़
- वराह
- हयग्रीव
इस रूप ने उन्हें अजेय शक्ति प्रदान की।
🪓 हनुमान जी की गदा का नाम और महत्व
हनुमान जी की गदा को “सौंदर्य गदा” कहा जाता है। यह उनकी शक्ति और वीरता का प्रतीक है।
हनुमान जी के 12 पवित्र नाम
इन नामों का जप करने से भय, रोग और बाधाएं दूर होती हैं।
अञ्जनिसुत हनुमानश्च वायुपुत्रो महाबलः।
रामेष्टः फाल्गुनसखश्च पिंगाक्षोऽमितविक्रमः॥
उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशनः।
लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा॥
संकटमोचनाय नमः॥
(स्रोत: पौराणिक स्तुति ग्रंथों से उद्धृत)
3. आधुनिक युग में हनुमान जी
कलयुग में हनुमान जी कहाँ हैं?
कई मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी अभी भी जीवित हैं और हिमालय, गंधमादन या कुछ अन्य तपोभूमियों में रामनाम का जाप कर रहे हैं।
️ कलयुग में हनुमान जी के दर्शन कैसे होंगे?
श्रद्धा, भक्ति और पवित्रता के साथ यदि कोई “हनुमान चालीसा” और “राम नाम” का नियमित जाप करे, तो कहा जाता है कि हनुमान जी के दर्शन संभव हैं।
हनुमान चालीसा और उसका महत्व
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा हनुमान जी की स्तुति में सबसे लोकप्रिय स्तोत्र है। इसके पाठ से भय, रोग और कष्ट दूर होते हैं।
निष्कर्ष
हनुमान जी केवल एक पौराणिक पात्र नहीं हैं, बल्कि वे भक्ति, सेवा और शक्ति के प्रतीक हैं। आज भी वे उन भक्तों के साथ हैं जो निस्वार्थ भाव से उनका स्मरण करते हैं।
उनकी कहानियाँ हमें प्रेरणा देती हैं कि कठिन से कठिन समय में भी विश्वास और समर्पण से सब संभव है।